पंचांग लोड हो रहा है...
असतो मा सद्गमय · तमसो मा ज्योतिर्गमय · मृत्योर्मा अमृतं गमय

चालीसा संग्रह

देवी-देवताओं की चालीसा — चालीस चौपाइयों का सरल हिंदी स्तोत्र। नियमित पाठ से इष्ट-कृपा और कष्ट-निवारण।

विज्ञापन स्थान (728×90)

प्रमुख चालीसाएं

चालीसा क्या है?

चालीसा एक भक्ति-स्तोत्र है जिसमें ४० चौपाइयाँ (छंद) होती हैं — इसी कारण इसका नाम "चालीसा" (चालीस + ईसा) पड़ा। प्रत्येक चालीसा दो दोहों से आरंभ होती है, फिर ४० चौपाइयों में देवता का गुणगान, उनकी लीलाओं का वर्णन और अंत में फलश्रुति होती है।

हनुमान चालीसा सर्वप्रथम संत तुलसीदास द्वारा लगभग १६वीं शताब्दी में रची गई थी। बाद में अन्य देवी-देवताओं की चालीसाएं भी प्रसिद्ध हुईं। प्रतिदिन या मंगलवार/शनिवार/शुक्रवार आदि विशेष दिनों में चालीसा-पाठ शुभफलदायी माना जाता है।

विज्ञापन स्थान (300×250)

चालीसा पाठ के लाभ

नियमित पाठ से मन में सात्विक भाव और एकाग्रता आती है। मानसिक तनाव, भय, चिंता दूर होते हैं। इष्ट-देव की कृपा से बाधाएँ दूर होकर सफलता प्राप्त होती है। श्रद्धा-पूर्वक पाठ से गृह-कलह और रोग-शोक का निवारण होता है। चालीसा कंठस्थ कर लेने से कठिन समय में मन को बल मिलता है।