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असतो मा सद्गमय · तमसो मा ज्योतिर्गमय · मृत्योर्मा अमृतं गमय

शिरडी साईं बाबा

सद्गुरु, फकीर, सर्व-धर्म-समभाव के मूर्तरूप — "सबका मालिक एक" का संदेश देने वाले संत

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आरती

जय जय साईं नाथा

गुरुवार को विशेष — साईं बाबा की प्रसिद्ध आरती
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जय जय साईं नाथा, स्वामी जय जय साईं नाथा ।
भक्तन के तुम सहायक, सब विधि सुख-दाता ॥
जय जय साईं नाथा ॥

श्री समर्थ सद्गुरु साईं, परब्रह्म तुम ही हो ।
सकल सिद्धियों के दाता, द्वारकामायी हो ॥

तुम्हरे चरण-कमल की, सेवा सब कर लें ।
सब इच्छाएं पूरी हों, मन में चैन भर लें ॥

राम-कृष्ण के समान, तुम भी अवतारी ।
हिन्दू-मुस्लिम सब के, तुम हो हितकारी ॥

"श्रद्धा-सबूरी" तुम्हारा, सिखाया मूल मंत्र ।
सबका मालिक एक है, यही जीवन का तंत्र ॥

उदी-प्रसाद देते हो, संकट हर लेते हो ।
रोग-दोष से मुक्त कर, मन को सुख देते हो ॥

जय जय साईं नाथा, साईं नाथा, साईं नाथा ।
हर शरण आये जन की, करते हो सहायता ॥
इस आरती में शिरडी के साईं बाबा की महिमा गाई गई है। सद्गुरु, परब्रह्म, द्वारकामायी (साईं के मस्जिद का नाम), सिद्धियों के दाता, हिन्दू-मुस्लिम के समान आराध्य। साईं बाबा का मूल संदेश "श्रद्धा" और "सबूरी" (धैर्य) — और "सबका मालिक एक" का अमर मंत्र। उदी (पवित्र-राख) प्रसाद का उल्लेख। गुरुवार को साईं-मन्दिरों में विशेष आरती होती है।
मंत्र

श्री साईं बाबा मंत्र

श्रद्धा-सबूरी का अमर मंत्र
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ॐ साईं नमः ॥
ॐ साईं नाथाय नमः ॥

ॐ श्री साईं नाथाय नमः,
ॐ श्री साईं रामाय नमः,
ॐ श्री साईं कृष्णाय नमः ।

सबका मालिक एक ।
श्रद्धा सबूरी ।

"क्यों डरते हो साईं हैं ना",
यह साईं वचन है ।

ॐ श्री सच्चिदानन्द समर्थ सद्गुरु साईं नाथ महाराज की जय ।
साईं बाबा का सबसे प्रसिद्ध संदेश "सबका मालिक एक" है — सब धर्मों का एक ही ईश्वर है। "श्रद्धा-सबूरी" — श्रद्धा (विश्वास) और सबूरी (धैर्य) ही जीवन के दो स्तंभ हैं। "क्यों डरते हो, साईं हैं ना" — यह आश्वासन-वचन हर संकट में स्मरण करने योग्य है। गुरुवार को विशेष पूजा। उदी (विभूति) प्रसाद के रूप में दी जाती है।
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भजन

देवा-देवा साईं देवा

साईं भक्तों का प्रिय भजन
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देवा देवा साईं देवा,
तू ही है मेरा सहारा ।
तेरे चरणों में बस गए हम,
तू ही है हमारा पारा ॥

श्रद्धा से जो आता तेरे द्वार,
खाली नहीं जाता ।
सबूरी से जो रुकता तेरे पास,
मनवांछित पाता ॥

उदी का प्रसाद देते हो,
हम सब को बाँट के ।
रोग-दोष सब दूर करते हो,
प्रेम-वर्षा कर के ॥

हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई,
सब को एक माना ।
"सबका मालिक एक" कहकर,
अनहद नाद बजाना ॥

देवा देवा साईं देवा,
ॐ साईं ॐ साईं ।
तेरी कृपा का कोई न पार,
ॐ साईं ॐ साईं ॥
यह सरल भक्ति-भजन साईं बाबा को समर्पित है। श्रद्धा-सबूरी, उदी-प्रसाद, "सबका मालिक एक" — साईं के मूल संदेशों का सुन्दर समावेश। सब धर्मों के लोग साईं की शरण में आते हैं और कृपा पाते हैं। समूह-कीर्तन और गुरुवार के सत्संग में विशेष लोकप्रिय।

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