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असतो मा सद्गमय · तमसो मा ज्योतिर्गमय · मृत्योर्मा अमृतं गमय

श्री खाटू श्याम जी

कलियुग के अवतारी देव — हारे का सहारा, बर्बरीक से श्याम कहलाने वाले महाभारत-कालीन वीर

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परिचय

श्री खाटू श्याम जी राजस्थान के सीकर जिले के "खाटू" गाँव में विराजमान कलियुग के सबसे प्रसिद्ध देवों में से एक हैं। मूल रूप से ये भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक थे। महाभारत युद्ध से पहले श्री कृष्ण ने इनसे शीश-दान माँगा था। प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने इन्हें वरदान दिया कि कलियुग में ये "श्याम" नाम से पूजे जाएंगे और भक्तों के "हारे का सहारा" बनेंगे।

"हारे का सहारा बाबा खाटू श्यामा" — इनका सबसे प्रसिद्ध नारा है। फाल्गुन शुक्ल एकादशी से द्वादशी के बीच खाटू में भव्य मेला लगता है, जहाँ लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

आरती

श्री श्याम आरती

खाटू नरेश की प्रसिद्ध आरती
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ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
निज भक्तन के तुमने, पूरण काज करे ॥
रत्न-जड़ित सिंहासन, स्थापित मूरत प्यारी ।
श्याम-श्याम जपते-जपते, भक्त उतारे आरती ॥
बर्बरीक तन-त्यागी, खाटू में अवतारी ।
शीश दान दे करके, अमर भये बाबा भारी ॥
हार के सहारा कहलाये, हारे का तू सहारा ।
दीन-दु:खी की पीड़ा हरते, प्रभु ओ श्याम हमारा ॥
इस आरती में बाबा खाटू श्याम के दिव्य रूप का वर्णन है — रत्न-जड़ित सिंहासन पर विराजमान, बर्बरीक के रूप में शीश-दान देने वाले, और कलियुग में हारे हुओं को आश्रय देने वाले। यह आरती फाल्गुन शुक्ल एकादशी, द्वादशी एवं प्रत्येक रविवार को विशेष रूप से गाई जाती है।
भजन

हारे का सहारा

खाटू श्याम जी का सबसे प्रसिद्ध भजन
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हारे का सहारा बाबा खाटू श्यामा ।
निर्बल का बल बाबा खाटू श्यामा ॥
तेरे दर पे जो आया खाली नहीं जाएगा ।
श्याम तेरा दीवाना मस्तानी पीगा ॥
लाखों के दिल में बसे हो श्याम-श्याम धुन ।
तेरे चरणों में मिलती हर मुश्किल का हल ॥
इस भजन का केंद्रीय भाव है कि बाबा खाटू श्याम वही हैं जो जीवन में सब तरफ से हार चुके भक्तों को सहारा देते हैं। निर्बल को बल, निराश्रित को आश्रय, दु:खी को सुख — यही खाटू नरेश की महिमा है। श्रद्धा से जो दर्शन को आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता।
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मंत्र

श्याम बाबा मंत्र

दैनिक जाप हेतु
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ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥

श्याम-श्याम भज बारम्बार ।
सहज ही मिल जायेंगे, बिगड़े सब काज ॥
खाटू श्याम जी का यह सरल मंत्र भक्तों द्वारा प्रतिदिन उच्चारित किया जाता है। माना जाता है कि "श्याम" नाम का बार-बार जप करने से जीवन के बिगड़े हुए कार्य अपने आप ठीक हो जाते हैं। प्रत्येक रविवार और एकादशी के दिन इस मंत्र का 108 बार जाप विशेष फलदायी है।
भजन

खाटू वाले श्याम

भक्ति का सरल भजन
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खाटू वाले श्याम तुम्हें नमन है ।
तेरे दर्शन को मन तरसन है ॥
फाल्गुन में मेला लगता खाटू में प्यारा ।
लाखों भक्त आते हैं, हर भक्त दीवाना ॥
तीन बाण धारी, बर्बरीक रूप तुम्हारा ।
कृष्ण को शीश दिया, तुमने वचन निभाया प्यारा ॥
इस भजन में खाटू धाम की महिमा, फाल्गुन में लगने वाले विश्व-प्रसिद्ध मेले, और बर्बरीक से श्याम बनने की कथा का सुंदर वर्णन है। तीन बाण धारी बर्बरीक ने अपना शीश श्री कृष्ण को दान कर दिया था — इसी त्याग के कारण कृष्ण ने उन्हें कलियुग में पूजे जाने का वरदान दिया।

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खाटू श्याम जी की कथा

महाभारत के समय बर्बरीक भीम के पौत्र थे। उन्होंने अपनी माता मौरवी और भगवान शिव से तीन अमोघ बाण प्राप्त किए थे — इसी कारण उनका नाम "तीन बाण धारी" पड़ा। जब महाभारत का युद्ध आरंभ हुआ, बर्बरीक ने युद्धभूमि की ओर प्रस्थान किया। श्री कृष्ण ने ब्राह्मण-वेश में उनसे पूछा कि वे किसकी ओर से लड़ेंगे। बर्बरीक ने कहा — "जो हार रहा हो, उसकी ओर से।"

श्री कृष्ण समझ गए कि अगर बर्बरीक हारती हुई पक्ष की मदद करते रहे, तो युद्ध कभी समाप्त ही नहीं होगा। तब श्री कृष्ण ने ब्राह्मण-वेश में बर्बरीक से शीश-दान माँगा। बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश दान कर दिया। प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने वरदान दिया — "कलियुग में तुम मेरे ही नाम 'श्याम' से पूजे जाओगे। हारे हुओं का सहारा बनोगे।"

बर्बरीक का शीश ने युद्ध-समाप्ति तक सम्पूर्ण युद्ध देखा। बाद में यह शीश राजस्थान के खाटू नामक स्थान पर एक गाय के थन से दूध गिरने पर खुदाई में प्रकट हुआ — यही आज का खाटू धाम है।

निशान यात्रा एवं फाल्गुन मेला

हर वर्ष फाल्गुन शुक्ल एकादशी से द्वादशी के बीच खाटू में विश्व-प्रसिद्ध फाल्गुन मेला लगता है। भक्त दूर-दूर से पैदल "निशान" (झंडा) लेकर आते हैं — इसे "निशान यात्रा" कहते हैं। बाबा को निशान चढ़ाना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। मेला लगभग १० दिनों तक चलता है और लाखों श्रद्धालु दर्शन-लाभ लेते हैं।

प्रत्येक रविवार खाटू श्याम का विशेष दिन माना जाता है। हर एकादशी और द्वादशी पर भी विशेष पूजा होती है। पिच्छले कुछ दशकों में दिल्ली-NCR, गुजरात, राजस्थान सहित सम्पूर्ण उत्तर भारत में खाटू श्याम भक्ति का अद्भुत प्रसार हुआ है।

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