नंद के आनंद भयो
हाथी, घोड़ा, पालकी — जय कन्हैया लाल की ॥
श्री गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की ।
श्री कृष्ण कन्हैया लाल की, जय कन्हैया लाल की ॥
राधे-राधे बोलो, जय कन्हैया लाल की ।
श्याम-श्याम बोलो, जय कन्हैया लाल की ॥
भगवान कृष्ण के जन्म का पावन उत्सव — भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी
द्वापर युग में मथुरा के अत्याचारी राजा कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह वसुदेव से कराया। विदाई के समय आकाशवाणी हुई — "हे कंस! जिस बहन को तू इतने प्रेम से विदा कर रहा है, उसी का आठवाँ पुत्र तेरा वध करेगा।" यह सुनकर कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया।
कारागार में देवकी के सात पुत्रों को कंस ने एक-एक करके मार डाला। फिर भाद्रपद माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी की रात्रि, रोहिणी नक्षत्र में, मूसलाधार वर्षा हो रही थी, चारों ओर अंधकार था — उसी समय भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप में देवकी की कोख से जन्म लिया।
कारागार के द्वार स्वतः खुल गए, पहरेदार सो गए। वसुदेव बालक कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार करके गोकुल में नंद-यशोदा के घर रख आए और वहाँ की कन्या को साथ ले आए। इस प्रकार भगवान कृष्ण ने ब्रज में लीला रचाई और बाद में कंस का वध कर पृथ्वी का भार उतारा।
१. सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
२. दिन भर निराहार/फलाहार व्रत रखें — कुछ लोग केवल जल पीते हैं, कुछ फल-दूध लेते हैं।
३. रात्रि १२ बजे (मध्यरात्रि) कृष्ण-जन्म का समय। उससे पूर्व ही पूजा-सामग्री तैयार रखें।
४. लड्डू-गोपाल/बाल-कृष्ण की प्रतिमा को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं।
५. नए वस्त्र पहनाएं, मुकुट-मोरपंख-बाँसुरी सजाएं, झूला झुलाएं।
६. माखन-मिश्री, धनिये की पंजीरी, खीर, फल का भोग लगाएं।
७. शंख-घंटा बजाकर "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" का जयकारा लगाएं।
८. आरती करें, प्रसाद वितरित करें और तब व्रत का पारण करें।
जन्माष्टमी के अगले दिन महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में "दही-हांडी" मनाई जाती है। बालकृष्ण अपने मित्र-गोपों के साथ माखन-मटकी फोड़कर खाते थे — इसी की स्मृति में युवक मानव-पिरामिड बनाकर ऊँचाई पर बंधी मटकी फोड़ते हैं और उसमें भरा माखन-दही प्रसाद के रूप में बाँटते हैं।
• घर पर बाल-कृष्ण को झूला बनाकर झुलाएं
• भगवद्गीता का पाठ करें
• रासलीला, कृष्ण-लीला नाटक का आयोजन/दर्शन
• गायों की सेवा करें — अन्न, घास खिलाएं
• भजन-कीर्तन करें
• गरीबों को अन्न-वस्त्र दान