भजन
रघुपति राघव राजा राम
महात्मा गांधी का प्रिय भजन — सर्व-धर्म समभाव
रघुपति राघव राजा राम
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पूर्ण पाठ
रघुपति राघव राजा राम,
पतित पावन सीताराम ।
रघुपति राघव राजा राम,
पतित पावन सीताराम ॥
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम ।
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम ॥
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान ।
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान ॥
रघुपति राघव राजा राम,
पतित पावन सीताराम ॥
पतित पावन सीताराम ।
रघुपति राघव राजा राम,
पतित पावन सीताराम ॥
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम ।
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम ॥
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान ।
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान ॥
रघुपति राघव राजा राम,
पतित पावन सीताराम ॥
अर्थ एवं भावार्थ
यह सर्वश्रेष्ठ राम-भजन सम्पूर्ण भारत में अत्यन्त लोकप्रिय है। महात्मा गांधी इसे प्रतिदिन गाते थे। पहली पंक्ति में राम के "रघुपति" (रघुवंश के स्वामी), "राघव" (राघव-कुल), "राजा राम" और "पतित-पावन" (पतितों को पवित्र करने वाले) — सब उपाधियाँ हैं। तीसरी पंक्ति में सर्व-धर्म समभाव — ईश्वर और अल्लाह दोनों एक ही प्रभु के नाम हैं। सबको सद्बुद्धि देने की प्रार्थना। समूह-कीर्तन में परम प्रिय।