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असतो मा सद्गमय · तमसो मा ज्योतिर्गमय · मृत्योर्मा अमृतं गमय

श्री राम

विष्णु के सप्तम अवतार — मर्यादा पुरुषोत्तम, अयोध्या-नरेश, सीता-वल्लभ

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भजन

रघुपति राघव राजा राम

महात्मा गांधी का प्रिय भजन — सर्व-धर्म समभाव
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रघुपति राघव राजा राम,
पतित पावन सीताराम ।
रघुपति राघव राजा राम,
पतित पावन सीताराम ॥

सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम ।
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम ॥

ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान ।
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान ॥

रघुपति राघव राजा राम,
पतित पावन सीताराम ॥
यह सर्वश्रेष्ठ राम-भजन सम्पूर्ण भारत में अत्यन्त लोकप्रिय है। महात्मा गांधी इसे प्रतिदिन गाते थे। पहली पंक्ति में राम के "रघुपति" (रघुवंश के स्वामी), "राघव" (राघव-कुल), "राजा राम" और "पतित-पावन" (पतितों को पवित्र करने वाले) — सब उपाधियाँ हैं। तीसरी पंक्ति में सर्व-धर्म समभाव — ईश्वर और अल्लाह दोनों एक ही प्रभु के नाम हैं। सबको सद्बुद्धि देने की प्रार्थना। समूह-कीर्तन में परम प्रिय।
भजन

श्री रामचन्द्र कृपालु भजमन

गोस्वामी तुलसीदास रचित अमर भजन
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श्री रामचन्द्र कृपालु भजमन,
हरण भव-भय-दारुणम् ।
नवकञ्ज-लोचन कञ्ज-मुख-कर,
कञ्ज-पद कन्दर्पम् ॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि नव,
नील-नीरद-सुन्दरम् ।
पटपीत मानहु तड़ित-रुचि शुचि,
नौमि जनक-सुतावरम् ॥

भजु दीन-बन्धु दिनेश दानव-,
दैत्य-वंश-निकन्दनम् ।
रघुनन्द आनन्द-कन्द कौशल-,
चन्द दशरथ-नन्दनम् ॥

सिर-मुकुट कुण्डल तिलक चारु,
उदारु अंग-विभूषणम् ।
आजानु-भुज शर-चाप-धर,
सङ्ग्राम-जित-खर-दूषणम् ॥

इति वदति तुलसीदास शङ्कर,
शेष-मुनि-मन-रञ्जनम् ।
मम हृदय-कञ्ज-निवास कुरु,
कामादि-खल-दल-गञ्जनम् ॥
गोस्वामी तुलसीदास रचित यह भजन रामायण के सार-स्वरूप है। श्री रामचन्द्र को भजने का आह्वान — जो कृपालु हैं, भव-भय का हरण करते हैं, कमल-समान नेत्र-मुख-हाथ-पैर वाले हैं, मेघ-समान श्याम-वर्ण और पीत-वस्त्रधारी हैं, दीन-बंधु, दैत्य-संहारक, रघुकुल के आनन्द, अयोध्या के चन्द्र, दशरथ के पुत्र हैं। अंत में तुलसीदास हृदय-कमल में राम के निवास की प्रार्थना करते हैं। राम-नवमी में विशेष पाठ।
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स्तुति

श्री राम स्तुति

रामचरितमानस से — श्री राम की दिव्य स्तुति
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श्री राम चन्द्र कृपालु भज मन हरण भव भय दारुणम् ।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंदर्पम् ॥

श्री रामं रमणीयं कुशलं कान्तं रामं रामं रमणं रमणीयम् ।
सीतापति रघुनाथ राम राम राम राम राम राम राम राम ॥

राम तारक मंत्र — श्री राम जय राम जय जय राम ।
यह तेरह अक्षरों का तारक मंत्र है ।

राम राम राम राम राम राम राम,
राम राम राम राम राम राम राम ।
श्री राम जय राम जय जय राम,
श्री राम जय राम जय जय राम ॥
"श्री राम जय राम जय जय राम" यह तेरह अक्षरों का तारक मंत्र है। शास्त्रों में कहा गया है — "राम राम राम राम राम राम राम — एक राम-नाम सब वेदों, उपनिषदों, पुराणों के सार-स्वरूप है।" इस मंत्र के नित्य जाप से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। यह "तारक" इसलिए कहलाता है क्योंकि यह संसार-सागर से तारता है। सरल और सब के लिए सुलभ।
स्तोत्र

श्री राम-रक्षा स्तोत्र (आरंभिक)

बुध कौशिक ऋषि रचित — सर्व-कल्याणकारी कवच
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अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः ।
श्रीसीतारामचन्द्रो देवता । अनुष्टुप्छन्दः ।
सीता शक्तिः । श्रीमद्हनुमान् कीलकम् ।
श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः ॥

॥ अथ ध्यानम् ॥
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं
पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम् ।
वामाङ्कारूढ-सीतामुखकमलमिल्ल्ल्ल्लोचनं नीरदाभं
नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचन्द्रम् ॥

॥ स्तोत्रम् ॥
चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम् ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥१॥
ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम् ॥२॥
सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तञ्चरान्तकम् ।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥३॥
रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥४॥
कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती ।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥५॥
श्री राम-रक्षा स्तोत्र की रचना बुध-कौशिक ऋषि ने स्वप्न में स्वयं भगवान शिव से आदेश पाकर की थी। यह सम्पूर्ण कवच रूप स्तोत्र है — हर अंग की देवता द्वारा रक्षा की प्रार्थना। शरीर के विभिन्न अंगों — सिर, ललाट, नेत्र, कान, नाक, मुख, कण्ठ आदि — की रक्षा के लिए राम के विभिन्न नाम-रूपों का स्मरण। नित्य पाठ से सब प्रकार की रक्षा, मनोवांछित फल-प्राप्ति, और महापातकों का नाश। रामनवमी पर विशेष पाठ।

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