आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता
माँ लक्ष्मी की प्रसिद्ध आरती — दीपावली पूजन में मुख्य
ॐ जय लक्ष्मी माता
YouTube पर सुनने के लिए क्लिक करें
सुनें
पूर्ण पाठ
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु धाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता ।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद-ऋषि गाता ॥
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति-दाता ।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि-धन पाता ॥
तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भव-निधि की त्राता ॥
जिस घर तुम रहती हो, ताहीं में गुण आता ।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता ।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥
शुभ गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता ।
रत्न-चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता ।
उर आनन्द-समाता, पाप उतर जाता ॥
स्थिर-चर जगत बचावत, कर्म-प्रेर लखि माता ।
सब-सुख-सिद्धि-दात्री, जग-तारिणि माता ॥
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु धाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता ।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद-ऋषि गाता ॥
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति-दाता ।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि-धन पाता ॥
तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भव-निधि की त्राता ॥
जिस घर तुम रहती हो, ताहीं में गुण आता ।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता ।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥
शुभ गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता ।
रत्न-चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता ।
उर आनन्द-समाता, पाप उतर जाता ॥
स्थिर-चर जगत बचावत, कर्म-प्रेर लखि माता ।
सब-सुख-सिद्धि-दात्री, जग-तारिणि माता ॥
अर्थ एवं भावार्थ
इस आरती में माँ महालक्ष्मी को सम्पूर्ण जगत् की माता, सूर्य-चन्द्र की आराध्या, दुर्गा-स्वरूपिणी, ऋद्धि-सिद्धि-धन देने वाली, क्षीर-सागर से प्रकट हुई, चौदह रत्नों की दात्री बताया गया है। दीपावली की रात लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद इस आरती को सपरिवार गाने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। शुक्रवार के दिन भी विशेष फलदायी।