दृश्यमान देवता — आरोग्य, तेज और जीवन-शक्ति के दाता
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सूर्य देव का स्वरूप
सूर्य देव सनातन धर्म के प्रत्यक्ष दृश्यमान देवता हैं — जिन्हें हम प्रतिदिन देख सकते हैं। वैदिक काल से ही सूर्य की उपासना की जा रही है। उन्हें "आदित्य", "भास्कर", "दिनकर", "दिवाकर" आदि अनेक नामों से जाना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर पूरे ब्रह्माण्ड में परिक्रमा करते हैं — सात घोड़े सात रंगों (इंद्रधनुष) के प्रतीक हैं। उनके सारथि अरुण हैं। ऋग्वेद में सूर्य को "आत्मा जगतस्तस्थुषश्च" — सम्पूर्ण चराचर का आत्मा कहा गया है।
सूर्य देव की उपासना से आरोग्य, तेज, बुद्धि, ऐश्वर्य और दीर्घायु प्राप्त होती है। ज्योतिष में सूर्य आत्मा का कारक है — पिता, सरकार, उच्च-पद, और सम्मान का प्रतिनिधि।
आरती
श्री सूर्य देव की आरती
प्रातः कालीन सूर्य आरती
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जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति-नन्दन । त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन ॥ सप्त-अश्व रथ राजित, एक चक्र धारी । दु:ख-हर्ता, सुख-कर्ता, मानव-हितकारी ॥ सुर-मुनि-भूसुर वंदित, विमल विभव कारी । तेज-प्रताप निधाना, त्रिभुवन उजियारी ॥ शरणागत प्रतिपालक, सूर्य-नारायण । नमो नमो जग-वंदन, ॐ जय भुवनेश्वर ॥ जय कश्यप-नन्दन, हे प्रभु जय अदिति-नन्दन । त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन ॥
अर्थ एवं भावार्थ
इस आरती में सूर्य देव को कश्यप ऋषि और देवी अदिति के पुत्र, सात अश्वों के रथ पर विराजमान, एक चक्र धारी, और तीनों लोकों के अंधकार को नष्ट करने वाला बताया गया है। वे भक्तों के हृदय में चंदन की तरह शीतलता प्रदान करते हैं, दुखों का नाश और सुख का वितरण करते हैं। प्रतिदिन प्रातः सूर्योदय के समय इस आरती का पाठ करने से तेज, आरोग्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
मंत्र
सूर्य गायत्री मंत्र
सूर्य देव के विशेष शक्तिशाली मंत्र
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सूर्य गायत्री का अर्थ है — "हम आदित्य भगवान को जानते हैं, भास्कर का ध्यान करते हैं, सूर्य देव हमें सद्बुद्धि प्रदान करें।" "ॐ घृणि सूर्याय नमः" का जाप विशेष रूप से रविवार को १०८ बार करना चाहिए। तीसरा श्लोक नवग्रह कार्यों में भी पढ़ा जाता है — "जो जपाकुसुम (हिबिस्कस) के समान लाल हैं, कश्यप ऋषि के पुत्र हैं, अंधकार के शत्रु और सभी पापों का नाश करने वाले हैं — उन सूर्य देव को मैं प्रणाम करता हूँ।"
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मंत्र
सूर्य नमस्कार के १२ मंत्र
योग में सूर्य नमस्कार के साथ जपे जाने वाले १२ नाम
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सूर्य नमस्कार करते समय इन १२ नामों का क्रमशः उच्चारण किया जाता है — प्रत्येक आसन पर एक नाम। ये बारह नाम सूर्य के बारह विभिन्न गुणों और भावों को दर्शाते हैं — मित्र (सबका मित्र), पूषा (पोषक), हिरण्यगर्भ (स्वर्ण-गर्भ), सविता (प्रेरक), आदित्य (अदिति-पुत्र) आदि। प्रतिदिन प्रातः सूर्य नमस्कार करने से शरीर लचीला, मन शांत और तेज प्रबल होता है।
१. प्रातः अर्घ्य: सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर खड़े होकर तांबे के लोटे में जल भरें, उसमें लाल फूल, अक्षत और रोली डालें। दोनों हाथों से जल चढ़ाते हुए सूर्य गायत्री बोलें।
२. सूर्य-नमस्कार: प्रतिदिन कम-से-कम ३, ७ या १२ बार सूर्य नमस्कार करें। योग की यह क्रिया सम्पूर्ण शरीर को लाभ पहुँचाती है।
३. रविवार व्रत: रविवार सूर्य देव का दिन है। इस दिन एक समय भोजन करें (नमक रहित), लाल वस्त्र पहनें और गेहूँ, गुड़, तांबा दान करें।
४. छठ पूजा: कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव की विशेष पूजा होती है — विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में।