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असतो मा सद्गमय · तमसो मा ज्योतिर्गमय · मृत्योर्मा अमृतं गमय

आरती संग्रह

प्रत्येक देवता की प्रामाणिक आरती — पूर्ण हिंदी पाठ और सरल अर्थ के साथ। पूजा-अर्चना के समय या प्रतिदिन गायन हेतु।

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देवता अनुसार आरतियाँ

आरती का महत्व

आरती शब्द संस्कृत के "आरात्रिक" से बना है, जिसका अर्थ है रात्रि के समय की पूजा। परंतु आजकल आरती दिन में किसी भी समय पूजा-समाप्ति पर की जाती है। आरती में भक्त घी या कपूर का दीपक जलाकर देवता के समक्ष घुमाते हैं और उसी समय भक्ति गीत गाते हैं।

शास्त्रों के अनुसार आरती पाँच तत्वों — अग्नि (दीपक), जल (शंख-जल), पृथ्वी (पुष्प), वायु (चामर) और आकाश (शब्द/घंटा) — से देवता का स्वागत करने का प्रतीक है। नियमित आरती करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

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आरती करने की विधि

१. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। २. पूजा-स्थल को साफ करें और देवता की प्रतिमा/चित्र के सामने आसन लगाएं। ३. घी या कपूर का दीप जलाएं। ४. शंख या घंटा बजाकर आरती आरंभ करें। ५. दीपक को देवता के सामने घड़ी की दिशा में सात बार घुमाएं। ६. आरती के बाद दीपक की ज्योति को सब उपस्थित जनों तक ले जाएं ताकि सब आशीर्वाद ग्रहण कर सकें। ७. अंत में प्रसाद वितरण करें।