या कुन्देन्दु तुषार हार धवला
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ॥
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता ।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥
विद्या एवं कला की देवी सरस्वती का पावन पर्व — माघ शुक्ल पंचमी
वसंत पंचमी हिंदू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी (पाँचवीं तिथि) को मनाया जाता है। यह दिन वसंत ऋतु के आरंभ का प्रतीक है — सर्दी जाती है और प्रकृति में नई कोंपलें फूटती हैं।
इस दिन विशेष रूप से माँ सरस्वती की पूजा होती है — विद्या, ज्ञान, संगीत, कला, और बुद्धि की देवी। शिक्षण-संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों, संगीत-विद्यालयों, और कला-केंद्रों में बड़े उत्साह से सरस्वती-पूजा होती है।
यह दिन छोटे बच्चों के "विद्यारम्भ संस्कार" (अक्षर-आरंभ) के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के बाद देखा कि चारों ओर सन्नाटा है — कोई शब्द, कोई गीत, कोई संगीत नहीं। उन्होंने अपनी कमंडल से जल छिड़का, और उसमें से एक अद्भुत स्त्री प्रकट हुईं — श्वेत वस्त्र, श्वेत कमल पर विराजमान, हाथों में वीणा, पुस्तक, और जप-माला।
ब्रह्मा जी ने उनसे प्रार्थना की — "हे देवी! कृपया इस सृष्टि को वाणी, ज्ञान, और संगीत प्रदान करें।" देवी ने वीणा बजाई — सम्पूर्ण सृष्टि में नाद-ब्रह्म व्याप्त हो गया। पक्षी गाने लगे, नदियाँ कलकल करने लगीं, हवा सरसराने लगी। यह दिन माघ शुक्ल पंचमी था।
तब से माँ सरस्वती को "वाग्देवी" (वाणी की देवी), "शारदा" (शरद-काल में प्रकट), "वीणावादिनी" (वीणा बजाने वाली) कहा गया।
१. पीला रंग: इस दिन का प्रमुख रंग पीला है — सरसों के खेतों के पीले फूलों, हल्दी, और वसंत-ऋतु की गर्मी का प्रतीक। लोग पीले वस्त्र पहनते हैं, पीली मिठाइयाँ (केसरी भात, बेसन के लड्डू, बूंदी, खीर) बनाते हैं।
२. सरस्वती पूजा: चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाकर माँ सरस्वती की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें। पीले फूल, अक्षत, चंदन, धूप-दीप अर्पित करें। पुस्तकें, संगीत-वाद्य, कलम-कागज भी पूजा में रखें।
३. विद्यारम्भ: छोटे बच्चों को पहली बार स्लेट-पेंसिल देकर "ॐ" या "अ" लिखवाया जाता है। माँ सरस्वती के चरणों में बच्चे को बैठाकर "सरस्वती वंदना" का पाठ करवाया जाता है।
४. पतंगबाजी: उत्तर भारत — दिल्ली, पंजाब, हरियाणा — में पतंग उड़ाई जाती है, हालांकि मुख्य पतंग-दिवस मकर संक्रांति है।
५. होली का आरंभ: कुछ क्षेत्रों में वसंत पंचमी से ही होली के गीत गाने शुरू कर दिए जाते हैं — "फाग" गीत।
६. पश्चिम बंगाल/ओडिशा: "श्री पंचमी" के नाम से बहुत भव्यता से मनाया जाता है — पंडाल, मूर्ति-पूजा, संगीत-समारोह।
१. स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र पहनें।
२. चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाकर माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
३. कलश-स्थापना — पानी, सुपारी, सिक्का, अक्षत डालें।
४. सफेद चंदन, अक्षत, पीले फूल अर्पित करें।
५. पुस्तकें, कलम, संगीत-वाद्य, कैंची-नैल कटर (कला-वस्तुएं) पूजा में रखें।
६. केसरी हलवा, बूंदी, खीर, दूध का भोग लगाएं।
७. "या कुन्देन्दुतुषारहारधवला" वंदना का पाठ करें।
८. "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" — 108 बार जाप।
९. सरस्वती आरती गाएं।
१०. क्षमा-प्रार्थना, प्रसाद वितरण।
विद्यार्थियों, शिक्षकों, संगीतकारों, कलाकारों, लेखकों, पत्रकारों — के लिए वसंत पंचमी सर्वश्रेष्ठ पर्व है। इस दिन का व्रत और पूजा के विशेष लाभ हैं:
• स्मरण-शक्ति में वृद्धि
• एकाग्रता एवं ध्यान-शक्ति
• वाणी की मधुरता
• परीक्षा में सफलता
• रचनात्मकता एवं नए विचारों का संचार
• संगीत/कला में उन्नति
• वाक्-दोष का निवारण