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असतो मा सद्गमय · तमसो मा ज्योतिर्गमय · मृत्योर्मा अमृतं गमय

रक्षा बंधन

भाई-बहन के पवित्र स्नेह का त्योहार — श्रावण पूर्णिमा

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परिचय

रक्षा बंधन हिंदू धर्म का एक प्राचीन एवं भावुक त्योहार है, जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसी कारण इसे "श्रावणी पूर्णिमा" भी कहते हैं। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर "रक्षा-सूत्र" (राखी) बाँधती हैं, और भाई बहन की आजीवन रक्षा का वचन देते हैं।

"रक्षा बंधन" का अर्थ है — "रक्षा का बंधन।" यह त्योहार भाई-बहन के निःस्वार्थ प्रेम, सुरक्षा-संकल्प, और पारिवारिक एकता का प्रतीक है।

पौराणिक कथाएँ

१. इन्द्र-इन्द्राणी की कथा: देवासुर संग्राम में जब असुर देवताओं पर भारी पड़ रहे थे, तब इन्द्राणी ने एक रक्षा-सूत्र बनाया और इन्द्र की कलाई पर बाँधा। बृहस्पति देव ने उस सूत्र को मंत्र-शक्ति से अभिमंत्रित किया। इन्द्र ने युद्ध में विजय प्राप्त की। यही पहला रक्षा-बंधन था।

२. द्रौपदी-कृष्ण कथा: एक बार श्री कृष्ण की उँगली कट गई और रक्त निकलने लगा। द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का छोर फाड़कर उनकी उँगली पर बाँध दिया। श्री कृष्ण ने प्रसन्न होकर वचन दिया — "मैं इस ऋण को आजीवन चुकाऊंगा।" बाद में जब दु:शासन ने भरी सभा में द्रौपदी का चीर हरण करने का प्रयास किया, श्री कृष्ण ने अनंत वस्त्र देकर उनकी लाज बचाई।

३. बलि-लक्ष्मी कथा: राजा बलि भगवान विष्णु के परम भक्त थे। विष्णु ने वामन अवतार लेकर तीन पग में सब कुछ नाप लिया, परंतु बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें पाताल का राज्य दिया और स्वयं भी उनके द्वारपाल बन गए। माँ लक्ष्मी ने ब्राह्मणी का रूप धारण कर बलि की कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधा और विष्णु जी को मुक्त करा कर बैकुंठ ले गईं।

४. कुन्ती-अभिमन्यु: महाभारत-युद्ध से पहले माता कुन्ती ने अपने पौत्र अभिमन्यु की कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधा था।

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ऐतिहासिक उल्लेख

रानी कर्णवती और हुमायूँ: सन् १५३५ में चित्तौड़ की रानी कर्णवती को बहादुर शाह से खतरा था। उन्होंने मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी भेजी। हुमायूँ ने तुरंत सेना के साथ चित्तौड़ की ओर प्रस्थान किया, परंतु पहुँचने तक रानी ने जौहर कर लिया था। यह घटना सिद्ध करती है कि राखी का संदेश धर्म-जाति से ऊपर है।

रवीन्द्रनाथ टैगोर: 1905 में बंगाल विभाजन के समय रवीन्द्रनाथ ने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए सामूहिक राखी बंधन अभियान चलाया।

पूजा एवं उत्सव विधि

१. प्रातः: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। बहनें नया साड़ी/सूट पहनती हैं।

२. थाली सजाएं: रोली, अक्षत (कच्चे चावल), दीपक, मिठाई, कुमकुम, और राखी।

३. भाई पूर्व/उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठे।

४. बहन भाई के माथे पर तिलक लगाए, अक्षत चिपकाए।

५. भाई की दायीं कलाई पर राखी बाँधे। मंत्र पढ़ें — "येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः । तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥" (अर्थ: जिस सूत्र से दानवेन्द्र महाबली बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से तुम्हें बाँधती हूँ — हे रक्षे, चलायमान न हो)।

६. आरती उतारें, मिठाई खिलाएं।

७. भाई बहन को उपहार दे — पैसे, कपड़े, गहने, या कुछ भी जो प्रेम दिखाए।

८. भाई आजीवन रक्षा का वचन देता है।

आधुनिक रक्षा बंधन

आज रक्षा बंधन केवल सगे भाई-बहन का त्योहार न रहकर — चचेरे भाई-बहन, मौसेरे, फुफेरे — सब के साथ मनाया जाता है। बहनें अपने मन-मित्र भाइयों, सहकर्मियों, मित्रों को भी राखी बाँधती हैं।

विदेशों में बसी बहनें अब Online राखी भेज देती हैं। Amazon, Flipkart, India Post सब यह सेवा देते हैं।

आधुनिक raksha bandhan में नई परंपरा: कई महिलाएं अब अपने पतियों को भी राखी बाँधती हैं — पति-पत्नी एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प। पुलिसकर्मियों, सैनिकों, चिकित्सकों को भी राखी बाँधने की परंपरा चली है — समाज की रक्षा के प्रतीक।

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