राम लला आये अयोध्या नगरी
हनुमान भी आये साथ में, बंदरों की सेना लाई ॥
रावण मारा लंका जीती, धर्म की पताका फहराई ।
दशहरे की मधुर बेला में, खुशियों ने ली अंगड़ाई ॥
राम राज्य की स्थापना से, प्रजा बहुत हर्षाई ।
घर-घर दीप जले प्रसन्नता, अयोध्या जगमगाई ॥
असत्य पर सत्य की विजय का पर्व — आश्विन शुक्ल दशमी
दशहरा (विजयादशमी) हिंदू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी (नवरात्रि के दसवें दिन) को मनाया जाता है। यह "असत्य पर सत्य", "अधर्म पर धर्म", और "अहंकार पर विनम्रता" की विजय का प्रतीक है।
"दशहरा" शब्द "दश" (दस) + "हरा" (हराने वाला) से बना है — अर्थात् दस प्रकार के पापों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य, अहंकार, आलस्य, हिंसा, चोरी) का नाश। साथ ही यह रावण के दस सिरों के नाश का भी प्रतीक है।
१. राम-रावण युद्ध: इसी दिन भगवान श्री राम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। १४ वर्षों के वनवास, सीता-हरण, हनुमान-लंका-दहन, और लंका-समुद्र-सेतु बनाकर युद्ध — सब इसी दिन समाप्त हुआ। श्री राम की विजय अधर्म पर धर्म, अहंकार पर विनम्रता, और भौतिकवाद पर आध्यात्मिकता की विजय थी।
२. दुर्गा-महिषासुर युद्ध: इसी दिन माँ दुर्गा ने नौ दिनों के युद्ध (नवरात्रि) के बाद महिषासुर का वध किया था। इसी कारण इसे "विजयादशमी" कहते हैं — विजय की दशमी।
१. रावण-दहन: देश-भर में रावण, मेघनाथ, और कुम्भकर्ण के विशाल पुतले बनाकर शाम को जलाए जाते हैं। पुतलों के अंदर पटाखे होते हैं — आग लगते ही गूंजते हैं। यह सम्पूर्ण समाज में अधर्म-नाश का सामूहिक संकल्प है।
२. रामलीला: नवरात्रि के नौ दिनों में सम्पूर्ण रामायण की लीला का मंचन होता है। दशहरे की रात राम-रावण युद्ध, रावण-वध, और सीता-वापसी का दृश्य प्रस्तुत किया जाता है। उत्तर भारत में यह बहुत लोकप्रिय है।
३. शस्त्र-पूजा: सेना, पुलिस, और कारीगर अपने शस्त्रों, औजारों एवं वाहनों की पूजा करते हैं। यह एक प्राचीन क्षत्रिय परंपरा है।
४. विद्यारम्भ: छोटे बच्चों का अक्षरारंभ संस्कार इसी दिन होता है। ज्ञान-प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ शुभ दिन।
५. आपा-मारी पूजा (बंगाल में दुर्गा विसर्जन): दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन इसी दिन।
६. मैसूर दशहरा: कर्नाटक के मैसूर में राजसी गजराज-शोभा-यात्रा निकाली जाती है, जो विश्व-प्रसिद्ध है।
७. कुल्लू दशहरा: हिमाचल प्रदेश में सात दिनों का अंतर्राष्ट्रीय मेला, जो दशहरे से शुरू होता है।
१. शस्त्रों/औजारों को साफ करें।
२. चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर रखें।
३. रोली, अक्षत, फूल, धूप-दीप अर्पित करें।
४. "ॐ अपराजितायै नमः" अथवा देवी मंत्र पढ़ें।
५. शस्त्रों पर तिलक करें।
६. मिष्ठान्न का भोग चढ़ाएं।
आज के समय में रावण केवल बाहरी शत्रु नहीं — वह हमारे भीतर का अहंकार, क्रोध, लोभ, और हिंसा है। हर वर्ष रावण-दहन का प्रतीक यह है कि हम स्वयं अपने भीतर के "रावण" को जलाएं — अपनी बुरी आदतों को त्यागें, सत्य का मार्ग अपनाएं।
श्री राम का जीवन हमें सिखाता है — मर्यादा, सत्य, धैर्य, करुणा, परिवार-प्रेम, और कर्तव्य-पालन। दशहरा हमें प्रेरित करता है कि हम भी "मर्यादा पुरुषोत्तम" बनने का प्रयास करें।